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August 14, 2018
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Taxation

E-way Bill के फेर में फंसी राजस्थान की ये प्रमुख इंडस्ट्री

इंट्रा सिटी ई-वे बिल ने कारोबारियों की परेशानी को बढ़ा दिया है। परेशान कारोबारी इंट्रा सिटी ई-वे बिल सिस्टम को समाप्त करने की मांग कर रहे है।

राजस्थान में टेक्सटाइल कारोबारियों के लिए इंट्रा सिटी ई-वे बिल परेशानी का कारण बन रहा है। राजस्थान के भीलवाड़ा, जोधपुर, पाली, बालोतरा, जयपुर के करीब 30 हजार से ज्यादा कपड़ा कारोबारी इस नए सिस्टम से खफा है। उनकी मांग है कि गुजरात, मध्यप्रदेश की तरह यहां भी टेक्सटाइल इंडस्ट्री को इंट्रा सिटी ई-वे बिल सिस्टम से मुक्त किया जाए। इस संबंध में मेवाड़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एमसीसीआई), लघु उद्योग भारती और टैक्स बार एसोसिएशन ने इंट्रा सिटी मूवमेंट पर ई-वे बिल व्यवस्था को बंद की मांग का ज्ञापन सीएम तथा उद्योग मंत्री को भेजा है।

तीन राज्यों में हो चुका है, राजस्थान में क्यों नहीं…

गौरतलब है कि गुजरात में 19 वस्तुओं को छोड़कर कपड़ा, यार्न सहित अन्य सभी को इंट्रा सिटी ई-वे बिल से फ्री कर दिया। इससे सूरत, अहमदाबाद, वापी, अंकलेश्वर शहरों के व्यवसायियों को राहत मिली।  मध्यप्रदेश में यार्न व कपड़ा को इंट्रा सिटी ई-वे बिल से मुक्त कर दिया। केवल 11 वस्तुओं पर ही इसे लागू रखा गया। यहां की सरकार ने माल एक से दूसरे जिले में ले जाने पर भी इंट्रा सिटी ई-बिल से मुक्त कर दिया। इसी तहर तमिलनाडु में एक लाख रु तक के जॉब वर्क, यार्न एवं कपड़े को इंट्रा सिटी ई-वे बिल से मुक्त रखा है। वहां इससे ज्यादा की कीमत पर ई-वे बिल जरूरी है।

कारोबारियों को यूं आ रही है परेशानी

ई-वे बिल लगाने के पीछे सरकार का तर्क है कि हर लेन-देन का रजिस्ट्रेशन हो ताकि व्यापारी टैक्स चोरी नहीं कर सके। जबकि व्यापारियों का कहना है कि इस व्यवस्था में अब व्यापारियों को माल पर बार-बार ई-वे बिल बनाना पड़ रहा है। उदाहरण के तौर पर जॉब वर्क पर डाइंग के लिए माल लाने ले जाने पर भी बार-बार ई-वे बिल बनाना पड़ता है। पाली में कपड़े की धुलाई, प्रिंटिंग, फिनिशिंग व डिस्पैच करने पर हर बार ई-वे बिल देना पड़ता है। बालोतरा (बाड़मेर) व जोधपुर की इंडस्ट्री भी बार-बार ई-वे बिल बनाने की समस्या से ही जूझ रही है। इससे आर्थिक भार भी पड़ रहा है। साथ ही माल की सप्लाई समय पर नहीं हो पा रही है।

बड़ी समस्या ये भी है

बिजली कटौती और इंटरनेट बंद हो तो ई-वे बिल नहीं बनता। पकड़े जाने के डर से गाड़ी माल लेकर रवाना नहीं हो सकती। बिजली-इंटरनेट बाधित रहने से माल परिवहन में घंटों की देरी हो रही है। इसी तरह किसी कारण 24 घंटे में माल नहीं उठाया तो दोबारा नया बिल बनवाना पड़ता है। टैक्सटाइल में जाॅब पर माल की जरूरत रात या दिन में कभी भी पड़ सकती है। रात में बिल नहीं बनने पर माल रोकना पड़ता है। इसलिए उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

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