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October 18, 2018
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जेटली ने कहा UPA ने खतरे में डाली थी देश की अर्थव्यवस्था

विकास दर को लेकर केंद्र सरकार पर लगाए जा रहे कांग्रेस के आरोपों का केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली कड़ा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि बैंकों की कमर UPA सरकार की नीतियों के कारण टूटी है।

देश में सर्वाधिक विकास दर के दावे को लेकर सरकार और कांग्रेस के बीच नई बहस शुरू हो गई है। केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने फेसबुक पर एक पोस्ट के जरिए कांग्रेस की UPA सरकार के समय दहाई में विकास दर हासिल करने के दावे का जवाब दिया है।

जेटली ने पोस्ट में लिखा है कि यूपीए सरकार की नीतियों की वजह से माइक्रो-इकनॉमी में अस्थिरता आई। उस वक्त राजकोषीय अनुशासन के साथ समझौता किया गया। बैंकों को बिना रोक-टोक कर्ज देने के निर्देश दिए गए जिसकी वजह से बैंकिंग व्यवस्था खतरे में पड़ गई। उन्होंने कहा ​है कि वर्ष 2014 में जब यूपीए की सरकार बनी तो पहले तीन साल में विकास का रिकॉर्ड मामूली था। जेटली ने अपनी पोस्ट में 1999 से 2018 तक के राजकोषीय घाटे, बैंक क्रेडिट ग्रोथ, मंदी और चालू खाता घाटे के आंकड़े भी पेश किए।

अरुण जेटली ने कहा कि वैश्विक स्थिति ने भारत की विकास दर बढ़ने में मदद की। उस दौरान मांग ज्यादा थी, निर्यात बढ़ रहा था और इसलिए उभरती हुई अर्थव्यवस्था के लिए यह अच्छा समय था। उस वक्त यूपीए सरकार ने किसी भी तरह का घरेलू सुधार नहीं किया गया। उन्होंने कहा, ‘जब यह हनीमून पीरियड खत्म हो गया तो विकास दर गिरने लगी।

विकास दर पर विवाद

दरअसल, यह विवाद नेशनल स्टेटिस्टिकल कमिशन (NSC) की सब कमिटी द्वारा जारी की गई 2011-12 की जीडीपी वृद्धि की श्रंखला को लेकर गहराया है। पुरानी श्रृंखला 2004-05 के तहत सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर स्थिर मूल्य पर 2006-07 में 9.57 प्रतिशत रही। उस समय मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। नई शृंखला (2011-12) के तहत यह वृद्धि दर संशोधित होकर 10.08 प्रतिशत रहने की बात कही गई है।

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